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प्रश्न 63-67 तक के उत्तर निम्न गद्यांश को पढकर देने है विचार-विनिमय के लिए केवल मनुष्य को ही वाणी का वरदार प्राप्त है. पशु पषी अपने भाव और विचार शारीरिक मुद्रांओ और संकेतों व्दारा प्रकटकरते है. वाणी के अनेक रुप है जो भाषा और बोली कहलाते है. प्राय सभी स्वतंत्र देशों की अपनी अपनी भाषाएँ है. उनक साथ स्थानीय बोलियाँ भी है जो भाषा का ही प्रादेशीक रुप है सबसे अधिक सुगम, सरल और स्वाभाविक भाषा मातृीभाषा कहलाती है. यह बालक को जन्मजात संस्कार से मिलती है अन्य भाषाए अर्जित भाषाए होती है जो अभ्यास व्दारा सीखी जाती है अपने घर परविार वर्ग जाति और देश के मध्य विचार विनिमय के लिए सबसे सरल मातृभाषा ही है . अपनी मातृभाषा व्दारा जितनी सहतजा से भाव व्यक्त किया जा सकता है वैसा सहज सामर्थ्य किसी अन्य अर्जित भाषा मे नही होता. राष्ट्र की एकता और पारस्परिक विचार विनिमय की सुविधा के लिए राष्ट्र भाषा की आवश्यकता मे किसी को भी संदेह नही हो सकता . सभी राष्ट्र अपनी राष्ट्रभाषा को सम्मान देते और व्यवहार मे लाते है. स्वतन्त्र भारत मे भी हमे अपने राष्ट्र की भाषाए को अपनाना चाहिए. राष्ट्रीय गौरव और स्वाभिमान के लिऐ यह आवश्यक है.प्रश्न राष्ट्रभाषा का महत्व इस तथ्य मे निहित जहै कि वह |
| A. | राष्ट्र को खडित करने मे सहायक होती है |
| B. | राष्ट्रीय एकता की द्योतक है |
| C. | राष्ट्रीय शक्तिीयों को दृढ करती है |
| D. | जातीय विकाय मे सहायक है |
| Answer» C. राष्ट्रीय शक्तिीयों को दृढ करती है | |