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:(प्र सं 37-41) नीचे दिए गए गघांश को पढिए एवं दिए गए प्रश्न के सही उत्तर चुनिए समस्याए वस्तुत: जीवन का पर्याय है | यदि समस्याए न हो तो आदमी प्राय: अपने आपको निष्क्‌रिय समझने लगेगा| ये समस्याए वस्तुत: जीवन की प्रगती का मार्ग प्रशस्त करती है| समस्या को सुलझाने समय उसका समाधान करते समय व्यक्ति का श्रेष्ठतम तत्व उभरकर आता है | घर्म दर्शन ज्ञान मनोविज्ञान इन्ही प्रयत्नो की देन है| पुरांणों में अनेक कथाए यह शिक्षा देती है कि मनुष्य जीवन कि हर स्थिती में जीना सीखे व समस्या उत्पन्न होने पर उसके समाधान का उपाय सेाचे जो व्यक्ति जितना उत्तरदायित्व पूर्ण कार्य करेगाा उतना ही उसके समक्ष्य समस्याए आएगी और उनकी महानता का निर्धारण किया जाएगा दो महत्वपूर्ण तथ्य स्मरणीय है -प्रत्येक समस्या अपने साथ संघर्ष लेकर आती है प्रत्येक संघर्ष के गर्भ में विजय निहित रहती है समस्त ग्रन्थो और महापुरुषों के अनुभवों का निष्कर्ष यह है कि संघर्ष से डरना और उससे विमुख होना लौकिक और पारलौकिक सभी दृष्टीयों से अहितकर है मानव धर्म के प्रतिकुल है और अपने विकास को अनावश्यक रूप से बाधित करना है आप जागिए उछिए दृड संकल्प किजीए और उत्साह एवं साहस के साथ संघर्ष रूपी विजय रथ पर चढ जाए और अपने जीवन के विकास के बाधाअेां रूपी शत्रुओ पर विजय प्राप्त किजीए इस गघांश को उचित शीर्षक दिजीए:

A. जीवन एक समस्या
B. महानता के उपाय
C. संघर्ष सफलता का आधार
D. जीवन -एक संघर्ष
Answer» D. जीवन -एक संघर्ष


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